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जायसी साहित्य : समन्वय की विराट साधना

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मलिक मुहम्मद जायसी एक सच्चे इंसान थे | यदि उन्हें ‘ जायस का मानस ’, इंसान-ए-कामिल अथवा वेद-विहित ‘मुनुर्भव’ का प्रतिरूप कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी | हिन्दी साहित्य में जायसी भारतीय समन्वित संस्कृति के प्रतिनिधि महाकवि है | जायसी-साहित्य भारतीय अनेकता में भावात्मक एकता के समन्वय की विराट साधना है | इस भावात्मक एकता का प्राण-तत्व ‘प्रेम’ है | जायसी का ‘पद्मावत’ सूफी प्रेमाख्यानक काव्य-परम्परा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और ज्वलन्त कीर्ति-स्तम्भ है |
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