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मथुरा कि शुंग और कुशाण कला समिक्षा

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भारत के प्राचीन इतिहास का एक विशेष स्थान है | मथुरा का सन्निवश यमुना के दक्षिण तट पर हुआ था प्राचीन काल से ही यह नगर भारतीय संस्कृतिक का प्रमुख केंद्र रहा है धर्म, दर्शन, कला भाषा और साहित्य के विकास में मथुरा का बहुत योगदान रहा है | पाणिनि की अष्टाध्याही में उसका उल्लेख है वाल्मीकि रामायन में मथुरा को मधुपुर का नगर कहा गया यादव प्रकाश के वैजयती कोश मे दो नाम मधुशिका और मधुपहना भी मिलते है |
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